हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 17.1.20

कांड 17 → सूक्त 1 → मंत्र 20 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 17)

अथर्ववेद: | सूक्त: 1
शु॒क्रोऽसि॑भ्रा॒जोऽसि॑ । स यथा॒ त्वं भ्राज॑ता भ्रा॒जोऽस्ये॒वाहं भ्राज॑ता भ्राज्यासम् ॥ (२०)
हे सूर्य! तुम शुक्ल अर्थात्‌ अत्यधिक उज्ज्वल हो तथा तुम दीप्तिशाली हो. तुम जिस प्रकार की ज्योति से पूर्ण रहते हो, मैं तुम्हारे उसी ज्योति पूर्ण भाव की उपासना करता हूं. (२०)
O sun! You are shukla i.e. very bright and you are bright. The kind of light you are full of, I worship your same light full sense. (20)