हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 18.3.36

कांड 18 → सूक्त 3 → मंत्र 36 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 18)

अथर्ववेद: | सूक्त: 3
ध॒र्तासि॑ध॒रुणो॑ऽसि॒ वंस॑गोऽसि ॥ (३६)
हे अग्नि! तुम सब के धारणकर्ता एवं धरुण हो. (३६)
O agni! You are the holder and creator of all. (36)