अथर्ववेद (कांड 18)
उ॑द॒पूर॑सिमधु॒पूर॑सि वात॒पूर॑सि ॥ (३७)
हे अग्नि! तुम उदक को पूर्ण करने वाले, मधु को पूर्ण करने एवं प्राण वायु को पूर्ण करने वाले हो. (३७)
O agni! You are the one who completes udak, completes honey and completes prana vayu. (37)