अथर्ववेद (कांड 18)
ये नः॑ पि॒तुःपि॒तरो॒ ये पि॑ताम॒हा य आ॑विवि॒शुरु॒र्व॑न्तरि॑क्षम् । तेभ्यः॑स्व॒राडसु॑नीतिर्नो अ॒द्य व॑थाव॒शं त॒न्वः कल्पयाति ॥ (५९)
हमारे पिता के जो पितर अर्थात् पितामह आदि तथा हमारे गोत्र में उत्पन्न पितर विस्तीर्ण अंतरिक्ष में प्रविष्ट हैं, उन के शरीरों का आज राजा यम अपनेआप हमारी इच्छा के अनुसार निर्माण करें. (५९)
Today, King Yama should automatically build the bodies of our father's ancestors i.e. Pitamah etc. and the ancestors born in our gotra are entered in the vast space. (59)