अथर्ववेद (कांड 18)
इ॒हैवैधि॑धन॒सनि॑रि॒हचि॑त्त इ॒हक्र॑तुः । इ॒हैधि॑ वी॒र्यवत्तरो वयो॒धा अप॑राहतः ॥ (३८)
हे मनुष्य! तू यहीं पर वृद्धि प्राप्त कर. तू यहीं पर ज्ञानवान हुआ है. तू यहीं कर्म करता हुआ हमें धन प्रदान कर. तू यहीं पर अतिशय बलवान बना तथा शत्रुओं से पराजित नहीं हुआ. तू अन्न को धारण करने वाला एवं दीर्घ आयु वाला हो कर वृद्धि प्राप्त कर. (३८)
O man! You get growth right here. You have become knowledgeable here. You work here and give us money. You became very strong here and were not defeated by the enemies. You should attain growth by being the one who holds food and has a long life. (38)