अथर्ववेद (कांड 18)
यथा॑ य॒माय॑ह॒र्म्यमव॑प॒न्पञ्च॑ मान॒वाः । ए॒वा व॑पामि ह॒र्म्यं यथा॑ मे॒ भूर॒योऽस॑त ॥ (५५)
जिस प्रकार पांच मनुष्यों ने यमराज के लिए घर बनाया है, उसी प्रकार मैं भी घर बनाता हूं. इस प्रकार मेरे बहुत से घर हो जाएं. (५५)
Just as five human beings have built a house for Yamraj, so I also build a house. Thus, I have many houses. (55)