अथर्ववेद (कांड 18)
इ॒दं हिर॑ण्यंबिभृहि॒ यत्ते॑ पि॒ताबि॑भः पु॒रा । स्व॒र्गं य॒तः पि॒तुर्हस्तं॒ निर्मृ॑ड्ढि॒दक्षि॑णम् ॥ (५६)
हे मरणासन्न पुरुष! तू इस सोने को धारण कर, जिसे तेरे पिता ने पहले धारण किया था. हे पुरुष! तू स्वर्ग को जाते हुए अपने पिता के दाएं हाथ को सुशोभित कर. (५६)
O dying man! You should take this gold, which your father had worn before. O man! Beautify your father's right hand as you go to heaven. (56)