हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 18.4.57

कांड 18 → सूक्त 4 → मंत्र 57 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 18)

अथर्ववेद: | सूक्त: 4
ये च॑ जी॒वा येच॑ मृ॒ता ये जा॒ता ये च॑ य॒ज्ञियाः॑ । तेभ्यो॑ घृ॒तस्य॑ कु॒ल्यैतु॒ मधु॑धाराव्युन्द॒ती ॥ (५७)
जो जीवित हैं, जो मर गए हैं, जो उत्पन्न हुए हैं तथा जो भविष्य में जन्म लेने वाले हैं, इन सब के लिए उमड़ती हुई जलधारा वाली छोटी नदी प्राप्त हो. (५७)
For those who are alive, those who have died, those who have been born and who are going to be born in the future, may you get a small river with a rising stream. (57)