हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 18.4.66

कांड 18 → सूक्त 4 → मंत्र 66 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 18)

अथर्ववेद: | सूक्त: 4
असौ॒ हा इ॒ह ते॒मनः॒ ककु॑त्सलमिव जा॒मयः॑ । अ॒भ्येनं भूम ऊर्णुहि ॥ (६६)
हे प्रेत! तेरा मन उस श्मशान में है. हे श्मशान भूमि! इस प्रेत को तुम उसी प्रकार ढको. जिस प्रकार स्त्रियां अपने कंधों को वस्त्र से ढकती हैं. (६६)
O ghost! Your mind is in that crematorium. O cremation ground! You cover this ghost in the same way. Just as women cover their shoulders with clothes. (66)