हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 18.4.67

कांड 18 → सूक्त 4 → मंत्र 67 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 18)

अथर्ववेद: | सूक्त: 4
शुम्भ॑न्तांलो॒काः पि॑तृ॒षद॑नाः पितृ॒षद॑ने त्वा लो॒क आ सा॑दयामि ॥ (६७)
हे प्रेत! तेरे बैठने के लिए पितरों के लोक प्रकट हों. मैं तुझे उसी लोक में प्रतिष्ठित करता हूं. (६७)
O ghost! Let the people of the ancestors appear for you to sit. I establish you in that world. (67)