अथर्ववेद (कांड 18)
शुम्भ॑न्तांलो॒काः पि॑तृ॒षद॑नाः पितृ॒षद॑ने त्वा लो॒क आ सा॑दयामि ॥ (६७)
हे प्रेत! तेरे बैठने के लिए पितरों के लोक प्रकट हों. मैं तुझे उसी लोक में प्रतिष्ठित करता हूं. (६७)
O ghost! Let the people of the ancestors appear for you to sit. I establish you in that world. (67)