हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 18.4.68

कांड 18 → सूक्त 4 → मंत्र 68 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 18)

अथर्ववेद: | सूक्त: 4
ये॒स्माकं॑पि॒तर॒स्तेषां॑ ब॒र्हिर॑सि ॥ (६८)
हे कुश! तू हमारे पूर्वज पितरों के बैठने का स्थान बन. (६८)
O Kush! You should be the place for our ancestors to sit. (68)