अथर्ववेद (कांड 18)
प्रास्मत्पाशा॑न्वरुण मुञ्च॒ सर्वा॒न्यैः स॑मा॒मे ब॒ध्यते॒ यैर्व्या॒मे । अधा॑जीवेम श॒रदं॑ शतानि॒ त्वया॑ राजन्गुपि॒ता रक्ष॑माणाः ॥ (७०)
हे वरुण! जिन पाशों अर्थात् फंदों से मनुष्य जकड़ जाता है, उन्हें हम से दूर रखो तुम्हारे द्वारा रक्षित हुए तथा भविष्य में तुम से रक्षा प्राप्त करते हुए हम सौ वर्ष की आयु प्राप्त (७०)
O Varuna! Keep away from us the loops with which man is gripped, protected by you and we attain the age of a hundred years, protecting from you in the future .