अथर्ववेद (कांड 18)
अ॒ग्नये॑कव्य॒वाह॑नाय स्व॒धा नमः॑ ॥ (७१)
कव्य वहन करने वाले अग्नि को स्वधा युक्त हवि प्राप्त हो. हम अग्नि को नमस्कार करते हैं. (७१)
The agni that carries the poem should get a white-rich glow. We salute agni. (71)
कांड 18 → सूक्त 4 → मंत्र 71 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation