अथर्ववेद (कांड 18)
नमो॑ वः पितरो॒भामा॑य॒ नमो॑ वः पितरो म॒न्यवे॑ ॥ (८२)
हे पितरो! तुम्हारे क्रोध के लिए नमस्कार है. हे पितरो! तुम्हारे मन्यु अर्थात् आक्रोश के लिए नमस्कार है. (८२)
O father! Hello to your anger. O father! Salutations to your manu i.e. outrage. (82)