अथर्ववेद (कांड 18)
नमो॑ वः पितरो॒यच्छि॒वं तस्मै॒ नमो॑ वः पितरो॒ यत्स्यो॒नं तस्मै॑ ॥ (८४)
हे पितरो! तुम्हारा जो कल्याणमय कर्म है, उस के लिए नमस्कार है. हे पितरो! तुम्हारा जो सुखमय कर्म है, उस के लिए नमस्कार है. (८४)
O father! Salutations to the welfare deed of yours. O father! Salutations to the happy deeds of yours. (84)