हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 19.18.6

कांड 19 → सूक्त 18 → मंत्र 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 19)

अथर्ववेद: | सूक्त: 18
अ॒पस्त ओष॑धीमतीरृच्छन्तु । ये मा॑ऽघा॒यव॑ ए॒तस्या॑ दि॒शोऽभि॒दासा॑त् ॥ (६)
दूसरों की हिंसा करने के इच्छुक जो शन्रु हैं, वे पश्चिम दिशा से आ कर रात्रि की उपासना करने वाले मेरी हिंसा करें, वे अपने विनाश की ओषशधियों अर्थात्‌ जड़ीबूटियों का सहयोग प्राप्त करने वाले जलों को प्राप्त हों. (६)
Those who are willing to do violence to others, those who come from the west and worship me at night, they should get the water that receives the support of their destruction, that is, herbs. (6)