हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 19.27.2

कांड 19 → सूक्त 27 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 19)

अथर्ववेद: | सूक्त: 27
सोम॑स्त्वा पा॒त्वोष॑धीभि॒र्नक्ष॑त्रैः पातु॒ सूर्यः॑ । मा॒द्भ्यस्त्वा॑ च॒न्द्रो वृ॑त्र॒हा वातः॑ प्रा॒णेन॑ रक्षतु ॥ (२)
ओषधियों अर्थात्‌ जड़ीबूटियों के राजा सोम ओषधियों की सहायता से तुम्हारी रक्षा करें. सूर्य देव नक्षत्रों की सहायता से तुम्हारी रक्षा करें. महीनों की सहायता से चंद्रमा, वृत्र अर्थात्‌ आवरण करने वाले अंधकार का नाश करने वाले इंद्र एवं प्राण वायु की सहायता से वायु देव तुम्हारी रक्षा करें. (२)
May Soma, the king of herbs, protect you with the help of medicines. Protect you with the help of Sun God constellations. With the help of months, the moon, the tree, that is, Indra, who destroys the darkness covering, and with the help of prana vayu, may the air god protect you. (2)