अथर्ववेद (कांड 19)
मा नो॑ मे॒धां मा नो॑ दी॒क्षां मा नो॑ हिंसिष्टं॒ यत्तपः॑ । शि॒वा नः॒ शं स॒न्त्वायु॑षे शि॒वा भ॑वन्तु मा॒तरः॑ ॥ (३)
हे द्यावा पृथ्वी! तुम मेरी बुद्धि को तथा दीक्षा को नष्ट मत करो. जल देवता मेरे लिए सुखकारी हों तथा मेरी आयु वृद्धि के लिए कहें. माता के समान हितकारी जल मेरे लिए कल्याणकारी हों. (३)
O earth! Don't destroy my intellect and initiation. May the water god be happy for me and ask for my age to increase. May water as beneficial as mother be beneficial for me. (3)