हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 19.44.10

कांड 19 → सूक्त 44 → मंत्र 10 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 19)

अथर्ववेद: | सूक्त: 44
मि॒त्रश्च॑ त्वा॒ वरु॑णश्चानु॒प्रेय॑तुराञ्जन । तौ त्वा॑नु॒गत्य॑ दू॒रं भो॒गाय॒ पुन॒रोह॑तुः ॥ (१०)
हे आंजन! मित्र देव और वरुण देव तुम्हारे पीछेपीछे भूमि पर पहुंचे तथा बाद में स्वर्ग को गए. तुम सुख का उपभोग करने के लिए उन्हें लाओ. (१०)
Hey Anjan! Friends Dev and Varun Dev followed you to the back land and later went to heaven. You bring them to consume pleasures. (10)