हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 19.44.8

कांड 19 → सूक्त 44 → मंत्र 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 19)

अथर्ववेद: | सूक्त: 44
ब॒ह्वि॒दं रा॑जन्वरु॒णानृ॑तमाह॒ पूरु॑षः । तस्मा॑त्सहस्रवीर्य मु॒ञ्च नः॒ पर्यंह॑सः ॥ (८)
हे राजा वरुण! यह मनुष्य सवेरे से शाम तक अनेक प्रकार का असत्य भाषण करता है. इस के असत्य भाषण को क्षमा करो. हे हजारों प्रकार की शक्ति वाले आंजन! इस असत्य भाषण रूप बाण से हमें सभी ओर से छुड़ाओ. (८)
O King Varuna! This man makes many types of false speeches from morning to evening. Forgive this untrue speech. O thousands of powerful arrows! Rescue us from all sides with this untrue speech arrow. (8)