अथर्ववेद (कांड 19)
त्वयि॑ रात्रि वसामसि स्वपि॒ष्याम॑सि जागृ॒हि । गोभ्यो॑ नः॒ शर्म॑ य॒च्छाश्वे॑भ्यः॒ पुरु॑षेभ्यः ॥ (९)
हे रात्रि! हम तुझ में निवास करते हैं. हम रात्रि के समय सोते हैं, पर तुम जाग्रत रहो. बुम हमारी गायों को, घोड़ों को तथा परिवारी जनों को सुख प्रदान करो. (९)
O night! We dwell in you. We sleep at night, but stay awake. Bum give happiness to our cows, horses and family members. (9)