हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 19.48.1

कांड 19 → सूक्त 48 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 19)

अथर्ववेद: | सूक्त: 48
अथो॒ यानि॑ च॒ यस्मा॑ ह॒ यानि॑ चा॒न्तः प॑री॒णहि॑ । तानि॑ ते॒ परि॑ दद्मसि ॥ (१)
मुझ से संबंधित जो बाहरी वस्तुएं गोचर तथा खुले प्रदेश में हैं तथा जो आसपास के घरों में विद्यमान हैं, मैं वे सभी वस्तुएं तुझे देता हूं. (१)
I give you all the external things related to me which are in the transit and open territory and which are present in the surrounding houses. (1)