अथर्ववेद (कांड 19)
अध॑ रात्रि तृ॒ष्टधू॑ममशी॒र्षाण॒महिं॑ कृणु । अ॒क्षौ वृक॑स्य॒ निर्ज॑ह्या॒स्तेन॒ तं द्रु॑प॒दे ज॑हि ॥ (१)
हे रात्रि! जिस सर्प की धुएं के समान सांस कष्टदायक है, उस का सिर काट दो. भेड़िए को नेत्रहीन कर के वृक्ष के नीचे मार डालो. (१)
O night! Cut off the head of a snake whose smoke-like breath is painful. Blindly kill the wolf under the tree. (1)