हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 19.50.2

कांड 19 → सूक्त 50 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 19)

अथर्ववेद: | सूक्त: 50
ये ते॑ रात्र्यन॒ड्वाह॑स्ती॒क्ष्णशृ॑ङ्गाः स्वा॒शवः॑ । तेभि॑र्नो अ॒द्य पा॑र॒याति॑ दु॒र्गाणि॑ वि॒श्वहा॑ ॥ (२)
हे रात्रि! तुम्हारे वाहन जो नुकीले सींगों वाले तथा अत्यधिक शीघ्र चलने वाले बैल हैं, उन के द्वारा हमें सभी रात्रियों के सभी अनर्थो से पार कराओ. (२)
O night! Make us overcome all the evils of all nights by your vehicles, which are fast-horned and very fast moving bulls. (2)