हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 2.17.6

कांड 2 → सूक्त 17 → मंत्र 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 2)

अथर्ववेद: | सूक्त: 17
चक्षु॑रसि॒ चक्षु॑र्मे दाः॒ स्वाहा॑ ॥ (६)
हे अग्नि देव! तुम चक्षु हो, इसीलिए मुझे चक्षु अर्थात्‌ देखने की शक्ति प्रदान करो. यह हवि भलीभांति हवन किया हुआ हो. (६)
O God of Agni! You are the eye, that is why give me the power to see. This havan is well done. (6)