अथर्ववेद (कांड 20)
चि॒त्रं दे॒वानां॑ के॒तुरनी॑कं॒ ज्योति॑ष्मान्प्र॒दिशः॒ सूर्य॑ उ॒द्यन् । दि॑वाक॒रोऽति॑ द्यु॒म्नैस्तमां॑सि॒ विश्वा॑तारीद्दुरि॒तानि॑ शु॒क्रः ॥ (१३)
ये किरणों वाले इंद्र सभी दिशाओं की ओर फैलाने वाले अपने प्रकाश से दिवस को प्रकट करते हैं तथा सभी अंधकारों और पापों से पार हो जाते हैं. (१३)
Indra with these rays reveals the day with his light spreading towards all directions and overcomes all darkness and sins. (13)