अथर्ववेद (कांड 20) अथर्ववेद: 20.129.6 | सूक्त: 129 क्वाह॑तं॒ परा॑स्यः ॥ (६) अवाहत अर्थात् घायल हुआ परास्य कहां है? (६) Where is the injured parasya? (6)