हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 3.13.1

कांड 3 → सूक्त 13 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 3)

अथर्ववेद: | सूक्त: 13
यद॒दः सं॑प्रय॒तीरहा॒वन॑दता ह॒ते । तस्मा॒दा न॒द्यो॒ नाम॑ स्थ॒ ता वो॒ नामा॑नि सिन्धवः ॥ (१)
हे जल! मेघों के द्वारा ताड़ित हो कर इधरउधर गमन करने और नाद करने के कारण तुम्हारा नाम नदी हुआ है. हे बहने वाले जल! तुम्हारे उदक आदि अन्य नाम भी इसी प्रकार सार्थक हैं. (१)
O water! You have been named river because of being chastised by the clouds and moving around and making noises. O flowing water! Other names like your udak etc. are also meaningful in the same way. (1)