हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 3.13.2

कांड 3 → सूक्त 13 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 3)

अथर्ववेद: | सूक्त: 13
यत्प्रेषि॑ता॒ वरु॑णे॒नाच्छीभं॑ स॒मव॑ल्गत । तदा॑प्नो॒दिन्द्रो॑ वो य॒तीस्तस्मा॒दापो॒ अनु॑ ष्ठन ॥ (२)
राजा वरुण के द्वारा प्रेरित होने के तुरंत बाद तुम एकत्र हो कर नृत्य करने लगे थे. उस समय तुम्हें द्र प्राप्त हुए थे. इस कारण तुम्हारा नाम आप हुआ. (२)
Soon after being inspired by King Varuna, you started dancing together. At that time you received the vision. That\'s why your name is you. (2)