हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 3.9.4

कांड 3 → सूक्त 9 → मंत्र 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 3)

अथर्ववेद: | सूक्त: 9
येना॑ श्रवस्यव॒श्चर॑थ दे॒वा इ॑वासुरमा॒यया॑ । शुनां॑ क॒पिरि॑व॒ दूष॑णो॒ बन्धु॑रा काब॒वस्य॑ च ॥ (४)
हे शत्रुओं को जीत कर यश की इच्छा करने वाले मनुष्यो! जिस प्रकार देवगण असुरों की माया से मोहित थे, उसी प्रकार तुम शत्रुओं द्वारा डाले गए विध्नों से मोहित हो. जिस प्रकार बंदर कुत्तों को भगा देता है, उसी प्रकार तुम्हारे द्वारा धारण किया हुआ खड्ग विच्नों को दूर भगा दे. (४)
O people who conquer enemies and desire success! Just as the Devas were fascinated by the maya of the asuras, so you are fascinated by the evils cast by the enemies. Just as the monkey drives away the dogs, so drive away the rags you wear away. (4)