अथर्ववेद (कांड 4)
सं वो॑ऽवन्तु सु॒दान॑व॒ उत्सा॑ अजग॒रा उ॒त । म॒रुद्भिः॒ प्रच्यु॑ता मे॒घा वर्ष॑न्तु पृथि॒वीमनु॑ ॥ (७)
हे मनुष्यो! शोभन दान वाले मरुत् तुम्हें तृप्त करें. अजगर से भी मोटी जल धाराएं उत्पन्न हों. वायु के द्वारा प्रेरित मेघ पृथ्वी पर वर्षा करें. (७)
O men! May the graceful donors satisfy you. Thick water streams should be generated from pythons. Rain on the earth induced by the cloud induced by the wind. (7)