हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 4.15.8

कांड 4 → सूक्त 15 → मंत्र 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 4)

अथर्ववेद: | सूक्त: 15
आशा॑माशां॒ वि द्यो॑ततां॒ वाता॑ वान्तु दि॒शोदि॑शः । म॒रुद्भिः॒ प्रच्यु॑ता मे॒घाः सं य॑न्तु पृथि॒वीमनु॑ ॥ (८)
प्रत्येक दिशा में बिजली चमके और बादलों को लाने वाली हवाएं चलें. वायु के द्वारा प्रेरित मेघ पृथ्वी पर वर्षा करें. (८)
Lightning shines in each direction and winds bring clouds. Clouds induced by wind rain on the earth. (8)