अथर्ववेद (कांड 4)
आपो॑ वि॒द्युद॒भ्रं व॒र्षं सं वो॑ऽवन्तु सु॒दान॑व॒ उत्सा॑ अजग॒रा उ॒त । म॒रुद्भिः॒ प्रच्यु॑ता मे॒घाः प्राव॑न्तु पृथि॒वीमनु॑ ॥ (९)
हे शोभन दान वाले मरुतो! तुम से संबंधित मेघों का जल, बिजली, जल से भरे हुए मेघ तथा अजगर के समान मोटी जल धाराएं पृथ्वी पर प्रवाहित हों. (९)
O Shoban Dan Wale Maruto! Let the water of the clouds related to you, electricity, clouds filled with water and thick water streams like pythons flow on the earth. (9)