हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 4.36.8

कांड 4 → सूक्त 36 → मंत्र 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 4)

अथर्ववेद: | सूक्त: 36
यं ग्राम॑मावि॒शत॑ इ॒दमु॒ग्रं सहो॒ मम॑ । पि॑शा॒चास्तस्मा॑न्नश्यन्ति॒ न पा॒पमुप॑ जानते ॥ (८)
मंत्र के प्रभाव से उत्पन्न मेरा यह बल जिस ग्राम में प्रवेश कर के निवास करता है, पिशाच उस ग्राम से भाग जाता है. वहां रहने वाले लोग पिशाचों के हिंसा रूपी पाप को नहीं जानते. (८)
The vampire runs away from the village where this force of mine, generated by the effect of the mantra, enters and resides. People living there do not know the sin of violence of vampires. (8)