अथर्ववेद (कांड 5)
हस्ते॑नै॒व ग्रा॒ह्य॑ आ॒धिर॑स्या ब्रह्मजा॒येति॒ चेदवो॑चत् । न दू॒ताय॑ प्र॒हेया॑ तस्थ ए॒षा तथा॑ रा॒ष्ट्रं गु॑पि॒तं क्ष॒त्रिय॑स्य ॥ (३)
यह हम को उत्पन्न करने वाली है, इस प्रकार जो कहे उस का संकल्प हाथ में ले. यह संकल्प लेने के लिए दूत को न भेजे. (३)
It is going to create us, thus taking the resolution of what we say in hand. Do not send messengers to take this resolution. (3)