हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 5.17.4

कांड 5 → सूक्त 17 → मंत्र 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 5)

अथर्ववेद: | सूक्त: 17
यामा॒हुस्तार॑कै॒षा वि॑के॒शीति॑ दु॒च्छुनां॒ ग्राम॑मव॒पद्य॑मानाम् । सा ब्र॑ह्मजा॒या वि दु॑नोति रा॒ष्ट्रं यत्र॒ प्रापा॑दि श॒श उ॑ल्कु॒षीमा॑न् ॥ (४)
ग्राम की ओर बढ़ती हुई तारिका को उल्का कहते हैं. उस उल्का का अंश जहां गिरता है, उस राज्य का नाश हो जाता है. इस प्रकार ब्रह्म से उत्पन्न तारिका राज्य का नाश कर देती है. (४)
The star moving towards the village is called a meteor. Where the fraction of that meteor falls, that state is destroyed. In this way, the tarika produced by Brahman destroys the state. (4)