अथर्ववेद (कांड 5)
अ॒क्षद्रु॑ग्धो राज॒न्यः॑ पा॒प आ॑त्मपराजि॒तः । स ब्रा॑ह्म॒णस्य॒ गाम॑द्याद॒द्य जी॒वानि॒ मा श्वः ॥ (२)
इंद्रियों को वश में न करने वाला एवं आत्मपराजित जो राजा ब्राह्मण की गाय का भक्षण करता है, वह पापी राजा जीवित नहीं रहता. (२)
The king who does not control the senses and the self-respecting king who eats the cow of the Brahmin, that sinful king does not survive. (2)