अथर्ववेद (कांड 5)
यद्दु॒द्रोहि॑थ शेपि॒षे स्त्रि॒यै पुं॒से अचि॑त्त्या । उ॑न्मोचनप्रमोच॒ने उ॒भे वा॒चा व॑दामि ते ॥ (३)
वूने जिस स्त्री अथवा पुरुष के प्रति वैरभाव रखते हुए इस पापपूर्ण अभिचार का प्रयोग किया है, मैं तुझे उस से मुक्त करने से संबंधित बात बताता हूं. (३)
I tell you about freeing you from the woman or man whom you have used this sinful act with enmity. (3)