हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 6.100.3

कांड 6 → सूक्त 100 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 6)

अथर्ववेद: | सूक्त: 100
असु॑राणां दुहि॒तासि॒ सा दे॒वाना॑मसि॒ स्वसा॑ । दि॒वस्पृ॑थि॒व्याः संभू॑ता॒ सा च॑कर्थार॒सं वि॒षम् ॥ (३)
हे वल्मीक की मिट्टी! तुम देव विरोधी असुरों की पुत्री और देवों की बहन हो. आकाश और धरती से उत्पन्न वल्मीक की यह मिट्टी स्थावर और जंगम प्राणियों से उत्पन्न विष को प्रभावहीन करे. (३)
O soil of Vulmik! You are the daughter of anti-gods asuras and sisters of devas. This soil of vulmic originating from the sky and earth should neutralize the poison produced by real and movable creatures. (3)