हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 6.129.3

कांड 6 → सूक्त 129 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 6)

अथर्ववेद: | सूक्त: 129
यो अ॒न्धो यः पु॑नःस॒रो भगो॑ वृ॒क्षेष्वाहि॑तः । तेन॑ मा भ॒गिनं॑ कृ॒ण्वप॑ द्रा॒न्त्वरा॑तयः ॥ (३)
जो भग नामक देव, अंधे होने के कारण आगे चलने में असमर्थ हैं और मार्ग में स्थित वृक्षों को नहीं छोड़ते हैं, हे ओषधि! मुझे उस भाग्य से भाग्यशाली बनाओ. हमारे शत्रु हम से दूर चले जाएं और बुरी दशा को प्राप्त हों. (३)
The God named Bhaga, who is blind, is unable to walk forward and does not leave the trees on the way, O O O Oushadhi! Make me lucky with that luck. Let our enemies move away from us and get a bad situation. (3)