अथर्ववेद (कांड 6)
नि शी॑र्ष॒तो नि प॑त्त॒त आ॒ध्यो॒ नि ति॑रामि ते । देवाः॒ प्र हि॑णुत स्म॒रम॒सौ मामनु॑ शोचतु ॥ (१)
हे पत्नी! मैं तेरे सिर से ले कर सारे शरीर में चिंताओं का प्रवेश कराता हूं! देवगण तेरे प्रति कामदेव को भेजें, जिस से दुःखी हो कर तू मेरा चिंतन करे. (१)
O wife! I bring anxieties from your head to the whole body! The gods should send Cupid to you, so that you may think of me as sad. (1)