अथर्ववेद (कांड 6)
अनु॑मतेऽन्वि॒दं म॑न्य॒स्वाकू॑ते॒ समि॒दं नमः॑ । देवाः॒ प्र हि॑णुत स्म॒रम॒सौ मामनु॑ शोचतु ॥ (२)
हे सब कर्मो की अनुमति देने वाली देव पत्नी! मुझ पर कृपा करो. हे संकल्प की देवी आकूति! तुम मेरे इस नमस्कार को स्वीकार करो. हे देवो! इस के प्रति कामदेव को भेजो, जिस से दुःखी हो कर यह मेरा स्मरण करे. (२)
O God wife who allows all the deeds! Please impress me. O Goddess of resolve! You accept this greeting of mine. O God! Send Cupid towards this, so that he may remember me in sorrow. (2)