हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 6.133.2

कांड 6 → सूक्त 133 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 6)

अथर्ववेद: | सूक्त: 133
आहु॑तास्य॒भिहु॑त॒ ऋषी॑णाम॒स्यायु॑धम् । पूर्वा॑ व्र॒तस्य॑ प्राश्न॒ती वी॑र॒घ्नी भ॑व मेखले ॥ (२)
हे मेखला! तुम आहुतियों के द्वारा संस्कार की गई तथा बंधन हेतु बुलाई गई हो, जिस से वे शत्रुओं का बंधन करते थे. तुम प्रारंभ किए गए कर्म से पहले होने वाली तथा शत्रुओं के वीरों का विनाश करने वाली हो. (२)
O melon! You have been cremated by the Ahutis and called for bondage, with which they used to bond the enemies. You are the one who precedes the action started and destroys the heroes of the enemies. (2)