अथर्ववेद (कांड 6)
ओता॒ आपः॑ कर्म॒ण्या॑ मु॒ञ्चन्त्वि॒तः प्रणी॑तये । स॒द्यः कृ॑ण्व॒न्त्वेत॑वे ॥ (२)
सदैव बहने वाले, लौकिक और वैदिक कर्मो के साधन जल हमें उत्तम फल शीघ्र पाने के लिए सभी पापों से बचाएं. (२)
May the water, which always flows, the means of cosmic and Vedic deeds, save us from all sins to get the best results quickly. (2)