हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 6.52.1

कांड 6 → सूक्त 52 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 6)

अथर्ववेद: | सूक्त: 52
उत्सूर्यो॑ दि॒व ए॑ति पु॒रो रक्षां॑सि नि॒जूर्व॑न् । आ॑दि॒त्यः पर्व॑तेभ्यो वि॒श्वदृ॑ष्टो अदृष्ट॒हा ॥ (१)
सूर्य देव हमारे प्रति उपद्रव करने वाले राक्षस, पिशाच आदि का विनाश करते हुए पूर्व दिशा में उदय होते हैं. सभी प्राणियों के द्वारा देखे गए और हमारे द्वारा अदृश्य राक्षसों आदि के हंता आदित्य उदयाचल पर्वत से उदय होते हैं. (१)
The Sun God rises in the east direction, destroying the demons, vampires, etc. who make a nuisance towards us. Aditya, the hanta of demons etc. seen by all beings and invisible by us, rises from Udayachal mountain. (1)