हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 6.65.2

कांड 6 → सूक्त 65 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 6)

अथर्ववेद: | सूक्त: 65
निर्ह॑स्तेभ्यो नैर्ह॒स्तं यं दे॑वाः॒ शरु॒मस्य॑थ । वृ॒श्चामि॒ शत्रू॑णां बा॒हून॒नेन॑ ह॒विषा॒ऽहम् ॥ (२)
हे देवो! असुरों का बाहुबल समाप्त करने के लिए तुम जो हिंसक बाण चलाते हो, मैं उस बाण रूप देवता को दिए जाने वाले हवि से अपने शत्रु की भुजाओं को काटता हूं. (२)
O God! To end the muscle power of the asuras, the violent arrow you shoot, I cut the arms of my enemy with the havi given to that arrow-form deity. (2)