अथर्ववेद (कांड 6)
आयम॑गन्त्सवि॒ता क्षु॒रेणो॒ष्णेन॑ वाय उद॒केनेहि॑ । आ॑दि॒त्या रु॒द्रा वस॑व उन्दन्तु॒ सचे॑तसः॒ सोम॑स्य॒ राज्ञो॑ वपत॒ प्रचे॑तसः ॥ (१)
आकाश में दिखाई देते हुए सब के प्रेरक सविता देव मुंडन करने वाले उस्तरे के साथ आए हैं. हे वायु! गरम जल के साथ तुम भी आओ. बारह आदित्य, एकादश रुद्र तथा आठ वसु-ये सब समान ज्ञान वाले हो कर उस जल से बालक का सिर गीला करें. हे सेवको! तुम वरुण और राजा सोम से संबंधित उस्तरे के द्वारा गीले बालों को काटो. (१)
Savita Dev, the inspiration of everyone appearing in the sky, has come with a razor shaving. O wind! You also come with hot water. Twelve Adityas, ElevenTh Rudra and eight Vasus - all of them with equal knowledge and wet the child's head with that water. O servants! You cut wet hair by razors related to Varuna and King Som. (1)