अथर्ववेद (कांड 6)
गि॒राव॑र॒गरा॑टेषु॒ हिर॑ण्ये॒ गोषु॒ यद्यशः॑ । सुरा॑यां सि॒च्यमा॑नायां की॒लाले॒ मधु॒ तन्मयि॑ ॥ (१)
हिमालय पर्वत में जो यश है, रथ में बैठ कर चलने वाले राजाओं में, स्वर्ण में और गायों में जो यश है, वह मुझे प्राप्त हो. पात्रों में ढाली जाती हुई मदिरा में और अन्न में जो मधुर रस रूपी यश है, वह मुझे प्राप्त हो. (१)
May I have the fame in the Himalayan mountains, the fame in the kings who sit in the chariot, in gold and in the cows. May I get the sweet juice-like fame in the wine and food molded in the characters. (1)