हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 6.68.3

कांड 6 → सूक्त 68 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 6)

अथर्ववेद: | सूक्त: 68
येनाव॑पत्सवि॒ता क्षु॒रेण॒ सोम॑स्य॒ राज्ञो॒ वरु॑णस्य वि॒द्वान् । तेन॑ ब्रह्माणो वपते॒दम॒स्य गोमा॒नश्व॑वान॒यम॑स्तु प्र॒जावा॑न् ॥ (३)
सविता देव ने जानते हुए जिस उस्तरे से सोम के और राजा वरुण के बालों को काटा, हे ब्राह्मणो! तुम उसी उस्तरे से इस पुरुष की दाढ़ी और मूंछों के बाल काटो. इस विशेष संस्कार से यह पुरुष अनेक गायों, घोड़ों और प्रजाओं से युक्त हो. (३)
Knowing that Savita Dev cut the hair of Som and King Varuna, O Brahmins! You cut the hair of this man's beard and mustache with the same razor. With this special rite, this man should be equipped with many cows, horses and subjects. (3)