अथर्ववेद (कांड 6)
प॑र॒मां तं प॑रा॒वत॒मिन्द्रो॑ नुदतु वृत्र॒हा । यतो॒ न पुन॒राय॑ति शश्व॒तीभ्यः॒ समा॑भ्यः ॥ (२)
वृत्रासुर का वध करने वाले इंद्र उस शन्रु को अत्यधिक दूर देश में जाने की प्रेरणा दें. वह बहुत वर्षों तक वापस न आए. (२)
May Indra, who killed Vritrasura, inspire that shanru to go to a very distant country. He did not come back for many years. (2)